EMI Full Form in Hindi – दोस्तों, क्या आपको पता है की ये EMI क्या होता है और अपने लोन का ईएमआई कैसे चैक करें? आज के इस लेख मे हम EMI के बारे मे विस्तार पूर्वक जानने वाले है! जैसे की ईएमआई का फुल फॉर्म क्या हैं? EMI के फ़ायदे और नुकसान या फिर EMI अच्छा है या बुरा?

कभी अगर कोई महंगी चीज आपको पसंद आ जाए और आपके पास उस वक्त पैसे ना हो तो आप क्या करेंगे? अधिकतर लोगों के दिमाग में यही बात आती है कि क्यों न इसे हम कुछ पैसे Down payment के रुप मे देखर EMI पर खरीद लें!

लेकिन दोस्तों ऐसे मे कभी कभी EMI मे महंगे समान खरीदने के चक्कर मे हमे हज़ारो रूपिये का घाटा हो सकता है! आप लोगों ने अक्सर अपने पड़ोसियों या रिश्तेदारों से सुना होगा कि वे गाड़ी की या घर की EMI भर रहे हैं या फिर कभी आप ही मार्केट से नया मोबाइल ईएमआई पर ले आते हैं!

ऐसे में हमें ईएमआई के बारे में जानना बहुत ही जरूरी हो जाता है! इससे पिछले पोस्ट में हमने बैंक चेक के बारे में सम्पूर्ण जानकारी के बारे में बताया था जिसके बारे में आप बैंक चेक क्या होते हैं? लिंक पर क्लिक करके जानकारी को पढ़ सकते हैं!

तो चलिये आज के इस पोस्ट में हम EMI क्या है? ईएमआई का फुल फॉर्म EMI Full Form in Hindi, EMI के फायदे और नुकसान क्या क्या हैं? और EMI कैसे भरा जाता हैं? के बारे में जानते हैं!

आज इस महंगाई के जमाने में EMI की मदद से अपने बजट के अनुसार जरूरत की चीजें आसानी से खरीदी जा सकती हैं.आइए EMI के बारे में विस्तार से वर्णन करते हैं!

ईएमआई का फुल फॉर्म – EMI Full Form in Hindi

ईएमआई का पूरा नाम Equated Monthly Installment होता हैं! यानी की EMI को हिन्दी भाषा में मासिक किस्त भी कहा जाता है! एक उधार लेने वाला व्यक्ति एक तय समय पर उधार की रकम का कुछ हिस्सा हर महीने चुकाता है! इसमें मूलधन के साथ साथ कुछ प्रतिशत ब्याज के भी जोड़े जाते है !

ईएमआई क्या है? What is EMI in Hindi

कभी- कभी कोई ऐसी जरूरत पड़ जाती है कि आपको किसी कंपनी या बैंक से लोन लेना पड़ता है, या आप अपने घर के लिए कोई सामान खरीदना चाहते हैं लेकिन आपके पास पूरे पैसे उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे में EMI आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है!

EMI की मदद से आप अपने लोन को किस्तों में चुका सकते हैं, अपने अनुसार तय रकम और समय पर आपको हर महीने थोड़ा थोड़ा पैसा देना होता हैं यह आप पर निर्भर करता है कि आप लोन को 6 महीने या 1 साल या 2 साल, कितने समय में चुकाना चाहते हैं! इसे डाउन पेमेंट भी कहते हैं. कई शॉपिंग वेबसाइट जैसे ऐमेज़ॉन या फ्लिपकार्ट पर भी आप सामान EMI पर ले सकते हैं!

ईएमआई का मतलब क्या होता है? EMI Meaning in Hindi

जब भी हम कोई महंगा सामान खरीदते हैं या लोन लेते है तो उसकी पेमेंट को किस्तों में करनी पड़ती हैं इस प्रोसेस को EMI कहा जाता हैं! जब आप इस तरह किसी EMI को मंथली चुकाते है तो इसके लिए आपको कुछ ब्याज भी देना पड़ता है! मूलधन में कुछ हिस्सा ब्याज का भी होता है!

कई बार बैंक से एक बड़ी रकम लोन ली जाती है, लेकिन उसे चुकाने के लिए पैसे नहीं होते हैं तब EMI की सुविधा अपनाई जाती है , जिससे आप पर कोई बजट का प्रेशर भी नहीं पड़ता है और आप धीरे-धीरे करके अपना लोन भी चुका सकते हैं!

EMI के फायदे क्या क्या हैं?

EMI का सबसे बड़ा फायदा यह है इसकी मदद से कोई भी ऐसा सामान आप खरीद सकते हैं जिसकी पेमेंट आप तुरंत नहीं कर सकते हैं!

कई बार ऐसे EMI ऑफर आते हैं, जिनमें कोई ब्याज नहीं लगाया जाता है जो कि आपके लिए काफी बजट फ्रेंडली हो सकता है!

अगर आप अपनी किस्तों को समय पर भर देते हैं, तो इससे आपके क्रेडिट स्कोर में बढ़ोतरी होती है!

EMI किसी अच्छी कंपनी से कराने पर धोखे के खतरे कम रहते हैं!

EMI आपके बजट को मेंटेन रखता है साथ ही आप अपनी जरूरत के सामान का लाभ तुरंत ले पाते हैं!

EMI के नुकसान क्या क्या हैं?

कई बार ग्राहक EMI के भरोसे पर महंगी चीजें ले लेते हैं लेकिन बाद में उन्हें किस्त चुकाने में समस्या आती है!

अगर ग्राहक समय पर किस्त ना भरे तो कई तरह के सर्विस टैक्स देने पड़ते हैं!
EMI करने के लिए उसकी कई पॉलिसी बनाई गई हैं, ग्राहक अगर उन पॉलिसी को ध्यान में ना रखे तो उसका नुकसान हो सकता है!

कई बार ग्राहक EMI के कम ब्याज प्रतिशत को देखकर फ्रॉड कंपनियों से धोखा खा जाते हैं!

EMI की सुविधा उनके लिए ही हैं , जिन्हे मंथली इनकम मिलती है और जो समय-समय पर हर महीने EMI भर सकते हैं!

EMI शुरू कैसे करते हैं?

EMI में पेपर वर्क प्रोसेस होता हैं! मान लीजिए कि आप फ्रिज की EMI कराना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले फ्रिज के दुकानदार के पास जाना होगा और उसे बताना होगा कि आप फ्रिज की पेमेंट एक साथ नहीं कर सकते हैं!

आप इसे EMI पर लेना चाहते हैं, अगर उसकी दुकान में यह सुविधा है तो वह आपकी EMI कर देगा अगर उसके पास यह सुविधा नही हैं तो किसी फाइनेंस या बैंक की मदद से आपकी EMI करा देगा!

इसके लिए आपके पास बैंक पासबुक, आधार कार्ड, चेक, बैंक अकाउंट इत्यादि होना आवश्यक है! जिस भी बैंक या वित्तीय संस्थान से आप लोन लेने जा रहे हैं उस बैंक की वैबसाइट में जाकर ईएमआई को आप भी केलकुलेट कर सकते हैं!

जैसे अगर आप HDFC Bank से होम लोन ले रहे हैं तो इस बैंक की होम लोन साइट www.hdfc.com में जाकर जरूर चेक कर लीजिये!

EMI कैसे भरते हैं?

EMI आपके बैंक अकाउंट से लिंक होती है! EMI फॉर्म भरते समय आपने उसमें महीने की जो भी डेट और जितना भी अमाउंट भर रखा है! वह नियत समय पर आपके बैंक अकाउंट से कट जाएगी!

अगर आपके अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है तो कोई अमाउंट नहीं कटेगा!

लेकिन समय से किस्त न चुकाने पर आपको पेनाल्टी भरनी पड़ेगी, साथ ही आपका सामान भी वापस लिया जा सकता है!

इसीलिए आपके खाते में EMI भरने के लिए पर्याप्त पैसे होना जरूरी है!

Home Loan EMI क्या है?

मान लीजिए आप कोई घर खरीदना चाहते हैं लेकिन आपके पास 20- 25 लाख रुपए का बजट नहीं है, ऐसे में आप EMI का विकल्प चुनेंगे!

आपकों बता दे होम लोन के लिए EMI में सुविधाएं उपलब्ध है इसमें लम्बे समय तक करीब 10 से 15 साल तक आपको अपना लोन चुकाने का अवसर दिया जाता है!

इस फंडिंग के माध्यम से आप तुरंत ही घर खरीद पाते हैं! हर एक बैंक होम लोन के लिए अपने-अपने ब्याज प्रतिशत रखती है!

बात करें भारतीय स्टेट बैंक की तो इस समय यहां होम लोन की दर 7.55% है! अगर हम इस आधार पर कैलकुलेशन करे तो अगले 15 साल तक आपको हर महीने 18597 रुपए चुकाने होंगे!

EMI अच्छा है या बुरा?

दी गई किसी भी सुविधा को हम अच्छा या बुरा नहीं कह सकते EMI को लेकर ग्राहक का बजट क्या कहता है, उनकी क्या इच्छाएं है , साथ ही क्या वे हर महीने किस्त भरने के लिए तैयार हैं या नही!

यह सभी बातें निर्भर करती है कि EMI फायदेमंद है या नुकसानदायक!

यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो मंथली इनकम करते हैं, उन्हे हर महीने एक फिक्स अमाउंट मिलता है, इस चीज का लाभ लेकर वे अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा EMI दे सकते हैं!

और कुछ ही सालों में वे खरीदा गया सामान अपना बना सकते हैं,या लिया गया लोन चुका सकते है!

लेकिन जो हर महीने इनकम नहीं करते हैं वे समय से किस्त नहीं चुका पाएंगे तो उनके लिए समस्या होगी उन्हें देर से किस्त चुकाने या किस्त नहीं चुकाने की वजह से कई तरह की पेनाल्टी भरनी पड़ सकती हैं, जो कि उनके बजट के लिए नुकसानदायक सिद्ध होगा!

EMI को कौन कौन से कारक प्रभावित कर सकते हैं?

EMIको प्रभावित करने वाले कारकों में सबसे पहले नंबर पर आता है, लोन की रकम ! ग्राहक ने बैंक से कितना लोन लिया है यह रकम EMI के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है!

इसी के आधार पर तय किया जाता है कि EMI राशि कितनी होगी!मूलधन जितना ज्यादा होगा ,EMI भी उतनी ही ज्यादा देनी पड़ेगी!

दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक है ब्याज की दर, बैंक या वित्तीय संस्थान ग्राहक को जो रकम दे रही है, वह उस पर कितने प्रतिशत का ब्याज ले रही है यह हर ग्राहक को जानना जरूरी होता है!

व्यक्ति के क्रेडिट प्रोफाइल का आकलन करके ही यह दर तय की जाती हैं!

तीसरा कारक लोन की अवधि है, लोन लेने वाला ग्राहक जिस समय सीमा के अंदर लोन चुका रहा है वही समय लोन की अवधि होती है!

अगर लोन की अवधि लंबी हो रही है तो लंबे समय के अनुसार ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा!

EMI कैलकुलेशन कैसे किया जाता है?

EMI= P × r × (1 + r) ^ n / ((1 + r) ^ n – 1)

इसी फार्मूले के आधार पर EMI कैलकुलेशन कर सकते हैं!

यहां, P लोन की रकम है जबकि r ब्याज की दर (जिसकी कैलकुलेशन मंथली बेस पर होती है)! n को लोन की अवधि (पर मंथ) से दर्शाते हैं!

उदाहरण के लिए

राधा ने 12% की ब्याज दर पर और 3 साल की अवधि के लिए 5 लाख रुपये की गाड़ी खरीदी है!ऊपर दिए गए फॉर्मूला के आधार पर जब EMI कैलकुलेशन किया जाएगा , तब

P=5 लाख रुपये

r=12%( साल का ),0 .01%(महीने का)

n (महीने में)=36 माह

महीने की ईएमआई लगभग 16,607 रुपए आयेगी!

निष्कर्ष – Conclusion

हमें उम्मीद है यह EMI का फुल फॉर्म (EMI Full Form in Hindi) आर्टिकल पढ़कर EMI से जुड़ी हुई सभी जानकारियां मिल गई होंगी! EMI आज के समय में सामान्य परिवारों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है, इस सुविधा का उपयोग भारी मात्रा में किया जा रहा है!

अगर आपको EMI से जुड़ी हुई कोई भी सुझाव हो तो हमें कमेंट सेक्शन के माध्यम से जरूर बताएं, हम आपकी समस्या सुलझाने का प्रयास करेंगे!

आप हमारे इस ईएमआई का फुल फॉर्म – EMI Full Form in Hindi पोस्ट को अन्य सोशल मिडिया प्लेटफार्म में शेयर जरूर कीजिए! ऐसे ही जानकारी वाले आर्टिकल्स पढ़ने के लिए आप हमारे अन्य पोस्ट को भी जरूर पढ़ें!

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